Solved CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi A Set 1

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Download Solved CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi A Set 1 2019 PDF to understand the pattern of questions asks in the board exam. Know about the important topics and questions to be prepared for CBSE Class 10 Hindi board exam and Score More marks. Here we have given Hindi A Sample Paper for Class 10 Solved Set 1.

Board – Central Board of Secondary Education, cbse.nic.in
Subject – CBSE Class 10 Hindi A
Year of Examination – 2019.

Solved CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi A Set 1

हल सहित सामान्य
निर्देश :

• इस प्रश्न-पत्र में चार खण्ड है – क, ख, ग, घ ।
• चारों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
• यथासंभव प्रत्येक खण्ड के क्रमशः उत्तर दीजिए |

खण्ड ‘क’ : अपठित बोध
1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
कम उमर में विकसित अवचेतन मन का हमारे जीवन पर असर बिलकुल हाल में । समझ में आया हो, ऐसा नहीं है। कोई 500 साल से कुछ धर्म-प्रचारकों में यह कहा जाता रहा है कि किसी भी बालक को हमें छह-सात साल की उमर तक के लिए दे दीजिए। वह बड़ा होने के बाद जीवन भर हमारा ही बना रहेगा। उन्हें पता था कि पहले सात साल में सिखाया गया ढर्रा किसी व्यक्ति की जीवन-राह तय कर सकता है। उस व्यक्ति की कामनाएँ और इच्छाएँ चाहे कुछ और भी हों, तो भी वह इस दौर को भूल नहीं पाता। क्या यह मान लें कि नकारात्मक बातों से भरे हमारे इस । अवचेतन मन से हमें आज़ादी मिल ही नहीं सकती? ऐसा नहीं है। इस तरह की आजादी की अनुभूति हर किसी को कभी न कभी जरूर होती है। इसका एक उदाहरण है, प्रेम की मानसिक अवस्था। प्रेम में, स्नेह में अभिभूत व्यक्ति का स्वास्थ्य कुछ अलग चमकता हुआ दिखता है, उसमें ऊर्जा दिखती है।

वैज्ञानिकों को हाल ही में पता चला है कि जो लोग रचनात्मक ढंग से सोचने की अवस्था में होते हैं, आनंद में रहते हैं, उनका चेतन मन 90 प्रतिशत सजग रहता है। चेतन अवस्था में लिए निर्णय और हुए अनुभव किसी भी व्यक्ति की मनोकामनाओं और महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप होते हैं। तब मन अपने अवचेतन के प्रतिबंधक ढरों पर बार-बार वापस नहीं लौटता है, लेकिन यह रचनात्मक अवस्था सदा नहीं रहती। जल्दी ही अवचेतन कमान पर लौट आता है।

मन का अवचेतन भाग अगर नए सिरे से, नए भाव से, सकारात्मक आदतें चेतन हिस्से से सीख सके तो इस समस्या का समाधान निकल आए।
(i) हमें नकारात्मक प्रतिबंधक ढरों से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
(ii) किसी व्यक्ति को जीवनभर अपना बनाने के लिए धर्मप्रचारकों ने क्या सुझाव दिया?
(iii) इस सुझाव का क्या आधार है?
(iv) लेखक ने अवचेतन मन की आजादी को किस उदाहरण दवारा स्पष्ट किया है?
(v) लेखक ने नकारात्मक बातों से भरे अवचेतन मन की समस्या का क्या समाधान सुझाया?
उत्तर-
(i) हमें नकारात्मक प्रतिबंधक ढ़रों से बचने के लिए रचनात्मकता का अपने अन्दर विकास करना चाहिए।

(ii) धर्मप्रचारकों ने सुझाव दिया कि बालक को छह-सात वर्ष की आयु तक धार्मिक गतिविधियों से जोड़कर रखना चाहिए।

(iii) इस सुझाव का यह आधार है कि पहले सात साल में सिखाया गया ढर्रा किसी व्यक्ति की जीवन राह तय कर सकता है। उस व्यक्ति की कामनाएँ और इच्छाएँ चाहे कुछ और भी हो, तो भी वह इस दौर को भूल नहीं पाता।

(iv) लेखक ने अवचेतन मन की आजादी को प्रेम की मानसिक अवस्था द्वारा स्पष्ट किया है। प्रेम में, स्नेह में अभिभूत व्यक्ति का स्वास्थ्य कुछ अलग चमकता हुआ दिखता है, उसमें ऊर्जा दिखती है।

(v) लेखक ने सुझाया कि मन का अवचेतन भाग अगर नए सिरे से, नए भाव से, सकारात्मक आदतें चेतन हिस्से से सीख सके तो इस समस्या का समाधान निकल आए।

2. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
इन नए बसते इलाकों में
जहाँ रोज बन रहे हैं नए-नए मकान
मैं अकसर रास्ता भूल जाता हूँ
धोखा दे जाते हैं पुराने निशान
खोजता हूँ ताकता पीपल का पेड़
खोजता हूँ ढहा हुआ घर
और जमीन का खाली टुकड़ा जहाँ से बाएँ
मुड़ना था मुझे
फिर दो मकान बाद बिना रंग वाले लोहे के फाटक का
घर था इकमंजिला
और मैं हर बार एक घर पीछे
चल देता हूँ। या दो घर आगे ठकमकाता ।
यहाँ रोज कुछ बन रहा है।
रोज कुछ घट रहा है।
यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं
एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
जैसे वसंत का गया पतझड़ को लौटा हूँ।
जैसे वैशाख का गया भादों को लौटा हूँ।
अब यही है उपाय कि हर दरवाजा खटखटाओ
और पूछो
क्या यही है वो घर ?
समय बहुत कम है तुम्हारे पास
आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देखकर
(i) कवि रास्ता क्यों भूल गया है?
(ii) वसंत का गया पतझड़ को लौटा हूँ- में कवि लगभग कितने मास बाद लौटा?
(iii) कवि अपने गंतव्य को कैसे खोज रहा है?
(iv) कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है?
(v) जब गतंव्य नहीं मिला तो उसे कौन-सी आशा की किरण दिखाई दी?
उत्तर-
(i) आए दिन नई बसावट हो जाने के कारण कवि रास्ता भूल गया।
(ii) कवि लगभग 10 – 11 महीने बाद वहाँ लौटा।
(iii) स्मृति के आधार पर पुराने चिहन के माध्यम से कवि अपने गंतव्य को खोज रहा है।
(iv) कविता में पीपल का पेड़, ढ़हा हुआ घर, खाली जमीन का टुकड़ा, बिना रंग वाले लोहे के फाटक वाला एक मंजिला मकान जैसे पुराने निशानों का उल्लेख किया गया
(v) कवि को लगा कि शायद कोई ऊपर छज्जे से उसे पहचानकर आवाज लगा दे तो उसकी समस्या हल हो जाये।

खण्ड ‘ख’ : व्याकरण
3. निर्देशानुसार उत्तर दीजिए
(क) वह कब्रिस्तान की जमीन थी जिसके किनारे पर दो-चार घर बने थे। (सरल वाक्य बनाइए।)
(ख) हमारा विद्यालय अपनी संस्कृति और कार्यशैली के लिए अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। (वाक्य का भेद बताइए।)
(ग) हम सभी बगीचे में घूमकर छात्रावास की ओर चल पड़े। (संयुक्त वाक्य में बदलिए।)
उत्तर-
(क) कब्रिस्तान की जमीन के किनारे पर दो-चार घर बने थे।
(ख) सरल वाक्य
(ग) हम सभी बगीचे में घूमे और छात्रावास की ओर चल पड़े।

4. निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तित कीजिए:
(क) तुलसीदास द्वारा ‘रामचरितमानस’ की रचना की गई। (कर्तृवाच्य में)
(ख) इतनी गर्मी में कैसे बैठा जाएगा। (कर्तृवाच्य में)
(ग) हम इतना भार नहीं सह सकते। (कर्मवाच्य में)
(घ) अब राष्ट्रपति नहीं आएँगे (भाववाच्य में)
उत्तर
(क) तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की।
(ख) इतनी गर्मी में कैसे बैठेगे/बैढ़ेगी/बैठेगा।
(ग) हमसे इतना भार नहीं सहा जा सकता/जाता।
(घ) अब राष्ट्रपति से नहीं आया जायेगा।

5. निम्नलिखित वाक्यों के रेखांकित पदों का परिचय दीजिए।
(क) हमारी बेपढ़ी-लिखी माँ यहाँ रहती हैं।
(ख) आज तक मैं उससे उबर नहीं पाई हूँ।
ग) वे चाहते थे मैं रसोई से दूर रहूँ।
(घ) वह स्वच्छ प्रशासन चाहता है।
उत्तर
(क) बेपढ़ी-लिखी-विशेषण, गुणवाचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य-माँ।
(ख) आज तक–क्रिया विशेषण, कालवाचक, उबरना क्रिया का विशेषण ।
(ग) रसोई से-संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, जातिवाचक, अपादान कारक।
(घ) चाहता है-क्रिया, सकर्मक, पुल्लिंग, एकवचन।

6. निम्न प्रश्नों के निर्देशानुसार उत्तर दीजिए
(क) वीभत्स रस का आलम्बन विभाव लिखिए।
(ख) करुण रस का उदाहरण लिखिए। ।।
(ग) उत्साह किस रस का स्थायी भाव है?
(घ) रण बीच चौकड़ी भर-भर कर चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था। किस रस का उदाहरण है।
उत्तर
(क) घृणित वस्तु, बदबू आदि।
(ख) छाया मत छूना मन, होगा दुःख दूना।
(ग) वीर रसः ।
(घ) वीररस ।

खण्ड ‘ग’ : पाठ्यपुस्तक व पूरक पाठ्यपुस्तक
7. निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
पुराने जमाने में स्त्रियों के लिए कोई विश्वविद्यालय न था। फिर नियमबद्ध प्रणाली का उल्लेख आदि पुराणों में न मिले तो क्या आश्चर्य? और, उल्लेख उसका कहीं रहा हो, पर नष्ट हो गया हो तो ? पुराने जमाने में विमान उड़ते थे। बताइए उनके बनाने की विद्या सिखाने वाला कोई शास्त्र! बड़े-बड़े जहाजों पर सवार होकर लोग दवीपांतरों को जाते थे। दिखाइए, जहाज बनाने की नियमबद्ध प्रणाली के दर्शक ग्रंथ! पुराणादि में विमानों और जहाजों द्वारा की गई यात्राओं के हवाले देखकर उनका अस्तित्व तो हम बड़े गर्व से स्वीकार करते हैं, परंतु पुराने ग्रंथों में अनेक प्रगल्भ पंडिताओं के नामोल्लेख देखकर भी कुछ लोग भारत की तत्कालीन स्त्रियों को मूर्ख, अनपढ़ और गवार बताते हैं।
(क) पुराणों में नियमबद्ध शिक्षा-प्रणाली न मिलने पर लेखक आश्चर्य क्यों नहीं मानता?
(ख) जहाज बनाने के कोई ग्रंथ न होने या न मिलने पर लेखक क्या बताना चाहता है?
(ग) शिक्षा की नियमावली का न मिलना, स्त्रियों की अनपढ़ता का सबूत क्यों नहीं है?

उत्तर
(क)
• पुराने जमाने में स्त्रियों के लिए कोई विश्वविद्यालय या शिक्षा की कोई विशेष व्यवस्था न थी।
• संभवत: इसका उल्लेख रहा हो और समय के साथ नष्ट हो गया हो।
(ख)
• ग्रंथों में किसी विषय या प्रणाली आदि का उल्लेख न मिलना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसका अस्तित्व ही नहीं था।
(ग)
• नियमावली न होने के बावजूद ग्रंथों में विदुषियों का नामोल्लेख।
• नियमावलियाँ समय के साथ नष्ट भी हो सकती हैं। (किसी एक बिंदु का उल्लेख अपेक्षित)
व्याख्यात्मक हल :
(क)  पुराणों में नियमबद्ध शिक्षा प्रणाली न मिलने पर लेखक आश्चर्य इसलिए नहीं मानता क्योंकि पुराने समय में स्त्रियों के लिए विश्वविद्यालय न होने के कारण उन्हें नियमानुसार शिक्षा नहीं मिल पाती थी। नए-नए अविष्कारों और खेल सम्बन्धी ग्रन्थों के
अस्तित्व को तो हम स्वीकार करते हैं लेकिन उस समय की स्त्रियों को अनपढ़ एवं गंवार बताते हैं।

(ख)  जहाज बनाने के कोई ग्रंथ न होने या न मिलने पर लेखक बताना चाहता है कि यद्यपि सबूत नहीं है, परन्तु संभावना हो सकती है कि उस समय भी तकनीक भरपूर विकसित हो।

(ग)  शिक्षा की नियमावली का न मिलना। स्त्रियों की अनपढ़ता का सबूत इसलिए नहीं है क्योंकि पुराने ग्रंथों में अनेक प्रगल्भ पंडिताओं का नामोल्लेख देखकर यह सिद्ध हो जाता है कि इनके समक्ष बड़े-बड़े विद्वान भी नहीं टिक पाते थे। इनमें अत्रि ऋषि की पत्नी, ऋषि पुत्री गार्गी, मंडन मिश्र की सहधर्मिणी प्रमुख हैं।

8. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए
(क) हालदार साहब को नेताजी की मूर्ति को देखकर कैसा अनुभव हुआ था और क्यों? पहली बार में पान के पैसे चुकाकर जब वे चलने लगे तो वे किसके प्रति नतमस्तक हुए थे?
(ख) “फादर कामिल बुल्के को जहरबाद से नहीं मरना चाहिये था।” लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?
(ग) संस्कृति के सन्दर्भ में लेखक ने मनुष्य की योग्यता को किन-किन रूपों में दर्शाया है? इसका क्या अभिप्राय है?
(घ) शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है? ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(क) बड़ा विचित्र, कौतुकपूर्ण चश्मेवाले की देशभक्ति के समक्ष, चश्मेवाले की मजाक उड़ाने पर उन्हें अच्छा नहीं लगा था। व्याख्यात्मक हल : नेताजी की पत्थर की मूर्ति पर असली चश्मा देखकर हालदार साहब को बड़ा विचित्र लगा और वे मुस्काए। चश्मेवाले की देशभक्तों के प्रति सम्मान की भावना देखकर वे कैप्टन के प्रति नतमस्तक हुए।

(ख) फादर कामिल बुल्के की मृत्यु गैंग्रीन नामक रोग से हुई। फादर का शांत अमृतमय जीवन देखा। लोगों को स्नेह वात्सल्य और करुणा का दान। ऐसे व्यक्ति की मृत्यु बढ़ी शांत होनी चाहिये।
व्याख्यात्मक हल :
फादर की मृत्यु एक प्रकार के फोड़े, गैंग्रीन रोग से हुई। लेखक का मानना है कि फादर ने सदैव दूसरों को प्रेम व अपनत्व बाँटा। ऐसे – सौम्य व स्नेही व्यक्ति के शरीर में जहरीला फोड़ा होना उनके प्रति अन्याय है।

(ग) नयी खोज करने वाला, नया आविष्कार करने वाला तथा विकास में योगदान देने वाले नियम बनाने वाला योग्य तथा सुसंस्कृत है। उसकी योग्यता संस्कृति की पोषक हैं।

(घ) इमराव गाँव के एक संगीत प्रेमी परिवार में बिस्मिल्ला खाँ का जन्म हुआ। शहनाई बजाने में रीड का प्रयोग होता है। यह रीड जिस घास से बनाई जाती है वह घास डुमराव गाँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।

9. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास,
यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य मलिन उपहास।
तब भी कहते ही कह डालें दुर्बलता अपनी बीती,
तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे यह गागर रीती।
(क) कवि ने मधुप के रूप में किसकी कल्पना की है? वह गुनगुना कर क्या कह रहा है ?
(ख) ‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ” किस ओर संकेत करती हैं? .
(ग) ‘गागर-रीती’ से क्या आशय है?
उत्तर-
(क) कवि ने मधुप के रूप में अपने मन की कल्पना की है। कवि का मधुप रूपी मन अभावों एवं कष्टों से भरे जीवन की निराशा और सूनेपन को गुनगुना कर बता रहा है।

(ख) जिस जीवन में कभी वसंत था, वहाँ दु:ख रूपी पतझड़ आ जाने के कारण सुख तथा आनंद की पत्तियाँ मुरझाकर गिर रही हैं अर्थात् सुखों का स्थान निराशा, चिंता और दुःख लेने लगे हैं।

(ग) ‘गागर-रीती’-खाली घड़ा अर्थात् असफल जीवन।

10. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किससे की गई है?
(ख) कवि देव ने श्रीकृष्ण को ‘ब्रज दूल्हा’ क्यों कहा है तथा उनके स्वरूप का किस प्रकार चित्रण किया है?
(ग) ‘छाया मत छूना’ में कवि ‘छाया’ किसे कहता है और क्यों?
(घ) संगतकार की आवाज में एक हिचक-सी क्यों प्रतीत होती है?
उत्तर
(क) जल के भीतर रहकर भी जल से अप्रभावित रहने वाले कमल के पते से।
व्याख्यात्मक हल:
उद्धव के व्यवहार की तुलना पानी के ऊपर तैरते हुए कमल के पते और पानी में डूबी हुई तेल की गागर से की गयी है।

(ख) नटवर वेश की झाँकी प्रस्तुत की है तथा उनको ब्रजदूल्हा कहा है चरणों के नुपूर और कटि की किंकिणी के मधुर स्वर पीताम्बर, वनमाला, मुकुट, मन को रोमांचित करने वाले चंचल नेत्र और उस पर उनकी मनमोहिनी मंदमंद हँसी है।
व्याख्यात्मक हल :
श्रीकृष्ण को ब्रजदूल्हा कहा है क्योंकि उनकी शोभा दूल्हे के समान लग रही है। पाँव में पाजेब, कमर में धुंघरूदार करधनी, तन पर पीले वस्त्र, गले में वनमाला और माथे पर मुकुट सुशोभित है। उनके नेत्र चंचल तथा मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर है जिसमें से मुस्कराहट रूपी चाँदनी फूट रही है।

(ग) अतीत की सुखद स्मृतियों को। क्योंकि बीते हुए सुखों और कल्पना का वर्तमान में कोई अस्तित्व नहीं है। वे यथार्थ रूप ग्रहण नहीं कर सकते और व्यक्ति के वर्तमान को दुविधाग्रस्त कर देते

(घ) संगतकार निस्वार्थ रूप से स्वयं को पृष्ठभूमि में रखकर मुख्य गायक की सफलता में योगदान देता है। उसे अपने योगदान का श्रेय लेने की कोई इच्छा नहीं होती। इसी कारण स्वयं को पीछे रखने की कोशिश में उसकी आवाज में हिचक-सी प्रतीत होती है।
व्याख्यात्मक हल :
संगतकार अपनी आवाज को पूरा खोलकर नहीं गाता, क्योंकि वह यह नहीं चाहता कि मुख्य गायक के सामने उसकी आवाज तेज हो जाये। उसे मालूम है कि यदि उसकी आवाज तेज होगी तो मुख्य गायक की आवाज का प्रभाव कम हो जायेगा। मुख्य गायक के प्रति उसके मन में श्रद्धा भी है, इसलिए उसकी आवाज में एक हिचक-सी प्रतीत होती है।

11. ‘आप चैन की नींद सो सकें इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं”-एक फौजी के इस कथन पर जीवन-मूल्यों की दृष्टि से चर्चा कीजिए।
उत्तर
(छात्रों के मतानुसार तकपूर्ण उत्तर स्वीकार्य।)
व्याख्यात्मक हल :
लेखिका मधु कांकरिया ने ‘साना-साना हाथ जोड़ि………..’ यात्रावृतांत में पूर्वोप्तर भारत के सिक्किम राज्य की राजधानी गंगटोक और उसके आगे हिमालय की यात्रा का वर्णन किया है। लेखिका जब गंगटोक के इतिहास को समझती हुई हिमालय के अनंत सौंदर्य को अपने भीतर समेटती हुई, भारत के स्विटजरलैण्ड कटाओं के बर्फ से ढके। पहाड़ों को देखती हुई जब आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें वहाँ कुछ | फौजी छावनियाँ दिखाई दीं तभी उन्हें ध्यान आया कि यह बॉर्डर एरिया है थोड़ी ही दूर पर चीन की सीमा है। मधु कांकरिया (लेखिका) ने जब एक फौजी से पूछा कि इतनी कड़कड़ाती ठंड में । आपको बहुत तकलीफ होती होगी। उसने उदास हँसी, हँसते हुए कहा-“आप चैन की। नींद सो सकें, इसलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं।” यह सुनकर लेखिका का मन उदास हो गया वे सोचने लगीं कि वैशाख के महीने में इस बफीले स्थान पर हम पाँच मिनट में ही ठिठुरने लगेंगे। हमारे ये फौजी भाई पौष और माघ में भी तैनात रहते हैं, उस समय सिवाय पेट्रोल के सब कुछ जम जाता है, ऐसे समय में ये जवान हमारे देश की और हमारी सुरक्षा के लिए तैयार खड़े रहते हैं।

खण्ड ‘घ’ : लेखन
12. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर। लगभग 200-250 शब्दों में निबंध लिखिए:
(क) एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
• सजावट और उत्साह
• कार्यक्रम का सुखद आनन्द
• प्रेरणा
(ख) वन और पर्यावरण
• वन अमूल्य वरदान
• मानव से संबंध
• पर्यावरण की शुद्धता
(ग) मीडिया की भूमिका
• मीडिया का प्रभाव
• सकारात्मकता और नकारात्मकता
• अपेक्षाएँ

उत्तर-
निबंध-लेखन
• प्रारंभ और समापन
• विषय-वस्तु (चार बिंदुं अपेक्षित)
• प्रस्तुति और भाषा
व्याख्यात्मक हल :
(क)          एक रंगा-रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
भारत देश अनेकता में एकता लिए हुए है और यहां की संस्कृति भी कई चीजो का मिश्रण है, जिसमें भारत का लम्बा इतिहास, विलक्षण भूगोल और वैदिक युग में विकसित हुई धर्म और स्वर्ण युग की शुरुआत और उसके आगमन के साथ फली-फूली अपनी खुद की विरासत शामिल है। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के रीति-रिवाज, परम्पराओं और विचारों का भी इसमें समावेश है। भारत कई धार्मिक प्रणालियों, जैसे कि हिन्दू धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म जैसे विश्व प्रसिद्ध धर्मों का जनक है। भारतीय संस्कृति विविधताओं से परिपूर्ण है जिसमें देश के प्रत्येक राज्य व क्षेत्र की अपनी भाषा, धर्म, समाज, परिवार, त्यौहार, भोजन, वस्त्र, साहित्य, इतिहास, काव्य महाकाव्य प्रदर्शन कला-संगीत, नृत्य, नाट्यकला आदि का विशेष योगदान है।

भारतवर्ष को पर्व और त्यौहारों का देश भी कहा जाता है यहाँ प्रतिदिन कोई न । कोई पर्व और उत्सव मनाया जाता है। और इन उत्सवों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम-सांस्कृतिक प्रदर्शन, प्रदर्शनियों या प्रतियोगिताओं का एक बार नियमित रूप से आवर्ती कार्यक्रम होता है। जब कभी भी रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन विद्यालयों में किया जाता है, तो विद्यालय के प्रत्येक वर्ग के छात्र और छात्राएँ पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं को भी शामिल किया जाता हैजिनमें भाषण प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कविता प्रतियोगिता, गीत संगीत और नाटक प्रतियोगिताएँ कई दिनों तक चलती हैं जिनमें हमें विभिन्न प्रांतों के लोक गीत और लोक नृत्य भी देखने को मिलते हैं पंजाब का भांगड़ा, असम का बीहू, राजस्थान का घूमर, गुजरात का डांडिया और गरबा नृत्य तो इन कायक्रमों में अधिक उत्साह भर देते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल का बाहरी व भीतरी भाग विशेष रूप से सजाया जाता है। कार्यक्रम स्थल के मुख्य द्वार को विशेष रूप से सजाया जाता है जहाँ फूलों और विविध प्रकार के रंगों से रंगोली बनाई जाती है और विशेष अतिथियों के स्वागत हेतु, तैयारी होती है-कार्यक्रम स्थल के साथ-साथ मंच को भी कार्यक्रम के अनुसार ही छोटा, बड़ा आकार दिया जाता है और उसे सजाया जाता है। इस सजावट में भी सभी बड़े उत्साह से भाग लेते हैं और अपने-अपने विचारों को व्यक्त करते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य-प्रतिभागियों के साथ-साथ दर्शकों का भी सर्वागीण विकास, उनके अन्दर शालीनता उदारता, सहिष्णुता, प्रेम, भाईचारा, देश भक्ति आदि भावों को विकसित करना है।

(ख)   वन और पर्यावरण
वर्तमान समय में हम प्रदूषण की समस्या का शिकार हो रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि खुली हवा में साँस लेना दूभर हो गया है। जहाँ इसका एक कारण जनसंख्या में असीमित वृद्धि है वहीं दूसरा प्रमुख कारण पेड़-पौधो की भारी कमी है। हमने प्रकृति के सन्तुलन को गड़बड़ा दिया है और यही कारण है कि शुद्ध वायु का मिलना कठिन हो गया है। |

वन प्रकृति की देन है। किसी देश की सुरक्षा, समृद्धि और सुन्दरता के लिए वनों का बहुत अधिक महत्व है किसी देश में पाए जाने वाले वन उस देश का जीवन होते हैं। यही कारण है कि हमारे देश में वृक्षों को लगाने और उनकी पूजा करने पर विशेष बल दिया गया है। पुराणों के अनुसार एक वृक्ष लगाने का पुण्य उतना ही है जितना गुणवान पुत्र का यश होता है।

प्राय: हम पेड़-पौधों के प्रति उदासीन रहते हैं पेड़ों की अंधाधुध कटाई जारी है और हमारा उस ओर ध्यान तक नहीं जाता। हम अपने स्वार्थ के लिए उन्हें काट रहे हैं। कई पर्वतीय स्थल तो इसके बुरी तरह शिकार हो चुके हैं। हाँ ‘चिपको आन्दोलन’ ने इसके प्रति जन-चेतना अवश्य जाग्रत की है, पर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

पेड़-पौधों से मानव का अटूट सम्बन्ध है। इनसे हमारा पर्यावरण प्रदूषण-रहित बना रहता है। पेड़ कार्बन-डाइ-ऑक्साइड लेकर ‘ ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जो हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। पेड़-पौधे वातावरण को तो सन्तुलित रखते ही हैं, इसके साथसाथ उनका हमारे जीवन में और भी महत्व है। पेड़-पौधों से हमें अनेक औषधियाँ प्राप्त होती हैं जो हमें स्वस्थ रखने में सहायक होती हैं। पेड़ वर्षा करने में भी सहायक सिद्ध होते हैं। अतिवृष्टि की स्थिति में ये वृक्ष भूमि के कटाव को रोकते हैं। इससे भूक्षरणनहीं हो पाता। नदी और वृक्षों का भी आपस में सम्बन्ध है।

हमें वृक्षारोपण की ओर उचित ध्यान देना होगा अन्यथा निरंतर बढ़ती जनसंख्या को साँस लेने तक को शुद्ध वायु उपलब्ध नहीं हो पाएगी। जीवन सही ढंग से जीने के लिए वृक्षों के समान निर्जीव हो जाएंगे। अत: हमें पेड़ लगाने एवं उनकी देखभाल के उपाय करने चाहिए। पेड़-पौधों से हमारा जीवन सुखद एवं स्वस्थ बनता है। पेड़-पौधों की रक्षा भी की जानी चाहिए। इससे पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखा जा सकेगा।

(ग)              मीडिया की भूमिका
मीडिया समाज का महत्वपूर्ण स्तम्भ होता है। चाहे वह प्रिण्ट मीडिया हो या इलेक्ट्रोनिक मीडिया। इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता स्थापित कर लोगों को जागरूक बनाकर जन-जागरण का कार्य करना होता है। वर्तमान समय में समाज के अन्दर जन-साधारण में चेतना आ रही है। आज के प्रजातांत्रिक युग में इलेक्ट्रोनिक मीडिया का उपयोग विशेष रूप से है, केवल पढ़े लिखे लोग ही नहीं अपितु अनपढ़ व्यक्ति भी देश के समाचार को जानने के इच्छुक होते हैं। युद्ध के दिनों में तथा चुनाव के दिनों में लोग समाचार जानने के इतने उत्सुक होते हैं कि जहाँ देखों वहाँ भीड़ एकत्रित हो जाती है। कुछ लोगों को तो दैनिक सूचना व देश विदेश की सूचनाओं को जाने बिना न भूख लगती है न प्यास।

किसी भी समस्या के लिए समाचार-पत्रों को माध्यम बनाकर अपनी बात पहुँचाने के लिए धरना, प्रदर्शन, जाम आदि कार्य करते हैं। इन सबके पीछे मीडिया के द्वारा नागरिकों को जागरूकता प्रदान की गई है।

मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है कि ये किसी के निजी जीवन में हस्तक्षेप न करे। इसका परिणाम आज यह दिखाई देता है कि मीडिया समाचार-पत्रों या खबर (समाचार) चैनलों में काल्पनिक नाम द्वारा पहचान को गुप्त रखकर समाचारों को प्रसारित करता है।

मीडिया का सामाजिक दायित्व यह है कि वे जन साधारण में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे। यह देखने में आता है कि इस दायित्व का भी निर्वाह करने में मीडिया सफल रहा है। संसार में लाभ हानि का चोली दामन का साथ है। मीडिया से जहां बहुत लाभ है, तो वहां कुछ हानियां भी हैं, कभी-कभी समाचार चैनलों द्वारा असली तथ्य को छिपाकर भ्रामक प्रचार भी कर दिया जाता है, तो इससे जनता का अहित होने का भय बना रहता है।

मीडिया का प्रमुख उद्देश्य समाज के सम्मुख सत्य घटनाओं को व्यक्त करना है। यदि वास्तव में देखा जाए, तो मीडिया सर्वांगीण विकास के साधन हैं। इनसे जुड़ने के पश्चात् हमारे अन्दर की संकीर्ण विचारधारा कोसों दूर भाग जाती है तथा हमारे हृदय में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना जाग्रत होती है।

13. आपके मित्र के पिता के सीमा पर शहीद हो जाने का समाचार प्राप्त होने पर । अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए मित्र को संवेदना पत्र लिखिए। |
उत्तर-
• प्रारूप/औपचारिकताएँ
• विषय-सामग्री
• भाषा
व्याख्यात्मक हल :
217-बी, मिंटो रोड,
नई दिल्ली दिनांक: 3 मई 20xx
प्रिय राजेश,
कल ही तुम्हारे पिता के सीमा पर शहीद हो जाने का समाचार सुनकर मैं बहुत अधिक शोकाकुल हो गया। अभी कुछ महीनों पहले ही मैं तुम्हारे घर आया तो मेरी मुलाकात तुम्हारे पापा से हुई थी। कल जब मैंने उनके शहीद होने का दुःखद समाचार सुना, तो सहसा विश्वास नहीं हुआ। ईश्वर की लीला कितनी विचित्र है। वह जो चाहे कर सकता है। हम मानव तो उसके हाथ की कठपुतलियाँ हैं। प्रिय राजेश! मैं जानता हूँ कि अचानक पिताजी की मृत्यु से तुम पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है। तथा छोटे-भाई की जिम्मेदारी तुम पर आ पड़ी है। तुम्हें तो गर्व होना चाहिए कि तुम्हारे पिता आतंकवादियों को मारकर खुद देश के लिए शहीद हो गए। अब तुम धैर्य से काम लेना। तुम्हें अपनी माँ तथा छोटे भाई-बहनों को भी धीरज बँधाना है।

मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह तुम्हें और तुम्हारे परिवार को दुःख की इस असीम घड़ी में अपरिचित विपत्ति एवं हानि को सहन
करने की शक्ति और साहस प्रदान करें।
अंत में ईश्वर से प्रार्थना है कि वह दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। तुम्हारा मित्र चन्द्रेश

14. किसी इंडक्शन चूल्हा का विज्ञापन 25-50 शब्दों में तैयार कीजिए।
उत्तर-
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi A Solved Set 1 14

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